Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 68 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 68

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
1/68
Adhyay 1 Shloka 68
Shloka
ब्राह्मस्य तु क्षपाहस्य यत्प्रमाणं समासतः। एकैकशो युगानां तु क्रमशस्तन्निबोधत॥
Pada
ब्राह्मस्य। तु। क्षपाहस्य। यत्। प्रमाणं। समासतः। एकैकशो। युगानां। तु। क्रमशस्। तन्। निबोधत।

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
ब्रह्म के दिन-रात का वर्णन
Meaning
[मनु महर्षियों से कहते हैं कि ] (ब्राह्मस्य तु क्षपा-अहस्य) परमात्मा के दिन-रात का (तु) तथा (एकैकश: युगानाम्) एक-एक युगों का (यत् प्रमाणम्) जो कालपरिमाण है (तत्) उसे (क्रमशः) क्रमानुसार और (समासतः) संक्षेप से (निबोधत) सुनो॥६८॥