Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 67 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 67

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 67
Shloka
दैवे रात्र्यहनी वर्षं प्रविभागस्तयोः पुनः। अहस्तत्रोदगयनं रात्रिः स्याद्दक्षिणायनम्॥
Pada
दैवे। रात्रि-अहनी। वर्ष। प्रविभागस्। तयोः। पुनः। अहस्। तत्र-उदगयनं। रात्रिः। स्याद्। दक्षिणायनम्।

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1 Bhashyas
Subject
देवों के दिन-रात
Meaning
(वर्षम्) मनुष्यों का एक वर्ष (देवे रात्र्यहनी) देवताओं के एक दिन-रात होते हैं (तयोः पुनः प्रविभागः) उनका भी फिर विभाग है (तत्र उदगयनम् अहः) उनमें 'उत्तरायण' देवों का दिन है, और (दक्षिणायनम् रात्रिः स्यात्) 'दक्षिणायन' देवों की रात है॥६७॥