Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 66 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 66

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 66
Shloka
पित्र्ये रात्र्यहनी मासः प्रविभागस्तु पक्षयोः। कर्मचेष्टास्वहः कृष्णः शुक्लः स्वप्नाय शर्वरी॥
Pada
पित्र्ये। रात्रि-अहनी। मासः। प्रविभागस। तु। पक्षयोः। कर्म-चेष्टास्व्। अहः। कृष्णः। शुक्लः। स्वप्नाय। शर्वरी।

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1 Bhashyas
Subject
दिन-रात का विभाग
Meaning
(सूर्य्य:) सूर्य (मानुष-दैविके) मानुष= मनुष्यों के प्रौर देवी-देवताओं के (अहोरात्रे) दिन-रातों का (विभजते) विभाग करता है, उनमें (भूतानां स्वप्नाय रात्रिः) प्राणियों के सोने के लिए 'रात' है और (कर्मरणां चेष्टा ग्रहः) कामों के करने के लिए 'दिन' होता है । ६५ ।।