Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 64 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 64

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 64
Shloka
निमेषा दश चाष्टौ च काष्ठा त्रिंशत्तु ताः कला। त्रिंशत्कला मुहूर्तः स्यादहोरात्रं तु तावतः॥
Pada
निमेषा। दश। च-अष्टौ। च। काष्ठा। त्रिंशत्। तु। ताः। कला। त्रिंशत्। कला। मुहूर्तः। स्याद्। अहोरात्रं। तु। तावतः।

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1 Bhashyas
Subject
दिन-रात का परिमारण
Meaning
(दश च अष्टौ च) दश और आठ मिलाकर अर्थात् अठारह (निमेषा:) निमेषों[=पलक झपकने का समय ] की (काष्ठा) १ काष्ठा होती है (ता: त्रिशत्तु) उन तीन काष्ठाओं की (कला) १ कला होती है (त्रिशतकलाः) तीस कलाओं का (मुहूर्त्तं स्यात्) एक मुहूर्त्तं [४८ मिनट का] होता है, और (तावत: तु) उतने ही अर्थात् ३० मुहूर्ती के (अहोरात्रम्) एक दिन-रात होते हैं॥६४॥