Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 6 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 6

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 6
Shloka
ततः स्वयंभूर्भगवानव्यक्तो व्यञ्जयन्निदम्। महाभूतादि वृत्तौजाः प्रादुरासीत्तमोनुदः॥
Pada
ततः। स्वयंभूर। भगवान्। अव्यक्तो। व्यञ्जयन्। इदम्। महाभूतादि। वृत्त-ओजाः। प्रादुर्। आसीत्। तमोनुदः।

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
जगदुत्पत्ति
Meaning
(ततः) तब (स्वयम्भूः) अपने कार्यों को करने में स्वयं समर्थ, किसी दूसरे की सहायता की अपेक्षा न रखने वाला (अव्यक्तः) स्थूल रूप में प्रकट न होने वाला (तमोनुदः) 'तम' रूप प्रकृति का प्रेरक = प्रकटावस्था की ओर उन्मुख करने वाला (महाभूतादि वृत्तौजाः) अग्नि, वायु आदि महाभूतों को आदि शब्द से महत् अहङ्कार आदि को भी [१ । १४-१५] उत्पन्न करने की महान् शक्तिवाला (भगवान्) परमात्मा (इदम्) इस समस्त संसार को (व्यञ्जयन्) प्रकटावस्था में लाते हुए ही (प्रादुरासीत्) प्रकट हुआ॥६॥