Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 54 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 54

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 54
Shloka
युगपत्तु प्रलीयन्ते यदा तस्मिन्महात्मनि। तदायं सर्वभूतात्मा सुखं स्वपिति निर्वृतः॥
Pada
युगपत्। तु। प्रलीयन्ते। यदा। तस्मिन्। महात्मनि। तदा-अयं। सर्वभूतात्मा। सुखं। स्वपिति। निर्वृतः।

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
1 (तस्मिन् महात्मनि) उस सर्वव्यापक परमात्मा के आश्रय में (यदा) जब (युगपत् तु प्रलीयन्ते) एकसाथ ही सब प्रारणी चेष्टाहीन होकर लीन हो जाते हैं (तदा) तब (अयं सर्वभूतात्मा) यह सव प्राणियों का आश्रयस्थान परमात्मा (निवृतः) सृष्टि-संचालन के कार्यों से निवृत्त हुआ-हुआ (सुखं स्वपिति) सुखपूर्वक सोता है ॥५४॥