Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 52 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 52

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 52
Shloka
यदा स देवो जागर्ति तदेवं चेष्टते जगत्। यदा स्वपिति शान्तात्मा तदा सर्वं निमीलति॥
Pada
यदा। स। देवो। जागर्ति। तद्। एवं। चेष्टते। जगत्। यदा। स्वपिति। शान्त-अत्मा। तदा। सर्वं। निमीलति।

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Subject
परमात्मा की जाग्रत् एवं सुषुप्ति अवस्थाएँ
Meaning
(यदा) जब (स: देव:) वह परमात्मा [१।६ में वर्णित ] (जागति) जागता है अर्थात् सृष्ट्युत्पत्ति के लिए प्रवृत्त होता है (तदा) तब (इदं जगत् चेष्टते) यह समस्त संसार चेष्टायुक्त [प्रकृति से समस्त विकृतियों की उत्पत्ति पुनः प्राणियों का श्वास-प्रश्वास चलना आदि चेष्टाओं से युक्त ] होता है, (यदा) और जब (शान्तात्मा) यह शान्त आत्मावाला सभी कार्यों से शान्त होकर (स्वपिति) सोता है अर्थात् सृष्टि-उत्पत्ति, स्थिति से निवृत्त हो जाता है (तदा), तब (सर्वम्) यह समस्त संसार (निमीलति) प्रलय को प्राप्त हो जाता है॥५२॥