Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 5 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 5

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
1/5
Adhyay 1 Shloka 5
Shloka
आसीदिदं तमोभूतं अप्रज्ञातं अलक्षणम्। अप्रतर्क्यं अविज्ञेयं प्रसुप्तं इव सर्वतः॥
Pada
आसीद्। इदम्। तमोभूतम्। अप्रज्ञातम्। अलक्षणम्। अप्रतक्य॑म्। अविज्ञेयं। प्रसुप्तम्। इव। सर्वतः।

Bhashya

Subject
उत्पत्ति से पूर्व जगत् की स्थिति
Meaning
(इदम्) यह सब जगत् (तमोभूतम्) सृष्टि के पहले प्रलय में अन्धकार से प्रवृत्त = आच्छादित था ।....... उस समय (अविज्ञेयम्) न किसी के जानने (प्रतम्) न तर्क में लाने और (अक्षरणम् अज्ञातम्) न प्रसिद्ध चिह्नों से युक्त इन्द्रियों से जानने योग्य था और न होगा। किन्तु वर्तमान में जाना जाता है और प्रसिद्ध चिह्नों से युक्त जानने के योग्य होता और यथावत् उपलब्ध है* । ।। ५ ।। (स० प्र० अष्टम स०) * (सर्वतः) सब ओर (प्रसुप्तम् इव) सोया हुआ-सा पड़ा था ।