Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 49 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 49

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 49
Shloka
तमसा बहुरूपेण वेष्टिताः कर्महेतुना। अन्तःसंज्ञा भवन्त्येते सुखदुःखसमन्विताः॥
Pada
तमसा। बहु-रूपेण। वेष्टिताः। कर्महेतुना। अन्तः-संज्ञा। भवन्त्येते। सुख-दुःख-समन्विताः।

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1 Bhashyas
Subject
वृक्षों में अन्तश्चेतना
Meaning
(कर्महेतुना) पूर्वजन्मों के कर्मों के कारण (बहुरूपेरण तमसा) बहुत प्रकार के तमोगुण से (वेष्टिता:) संयुक्त या घिरे हुए (एते) ये स्थावर जीव (अन्त:संज्ञाः भवन्ति) आन्तरिक चेतना वाले [जिनके भीतर तो चेतना है किन्तु बाहरी क्रियाओं में प्रकट नहीं होती] होते हैं (सुख-दुःखसमन्विताः) और सुख-दुःख के भावों से युक्त होते हैं॥४६॥