Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 47 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 47

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 47
Shloka
अपुष्पाः फलवन्तो ये ते वनस्पतयः स्मृताः। पुष्पिणः फलिनश्चैव वृक्षास्तूभयतः स्मृताः॥
Pada
अपुष्पाः। फलवन्तो। ये। ते। वनस्पतयः। स्मृताः। पुष्पिणः। फलिनश्। च-एव। वृक्षास्। तु-उभयतः। स्मृताः।

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1 Bhashyas
Subject
वनस्पति तथा वृक्ष
Meaning
(ये अपुष्पाः फलवन्तः) जिन पर बिना फूल आयें ही फल लगते हैं (ते) वे (वनस्पतयः स्मृताः) 'वनस्पतियाँ' कहलाती हैं [जैसे-बड़ (वट), पीपल, गूलर आदि] (च) और (पुष्पिण: फलिन: एव) फूल लगकर फल लगने वाले (उभयतः) दोनों से युक्त होने के कारण (वृक्षाः) वे उद्भिज्ज स्थावर जीव 'वृक्ष' (स्मृताः) कहलाते हैं॥४७॥