Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 46 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 46

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 46
Shloka
उद्भिज्जाः स्थावराः सर्वे बीजकाण्डप्ररोहिणः। ओषध्यः फलपाकान्ता बहुपुष्पफलोपगाः॥
Pada
उद्भिज्जाः। स्थावराः। सर्वे। बीज-काण्डप्ररोहिणः। ओषध्यः। फलपाकान्ता। बहु-पुष्प-फल-उपगाः।

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1 Bhashyas
Subject
उद्भिज्ज तथा ओषधियां
Meaning
(बीजकाण्डप्ररोहिरण:) बीज और शाखा से उत्पन्न होने वाले (सर्वे स्थावराः) सब स्थावर [एक स्थान पर टिके रहने वाले] जीव वृक्ष आदि (उद्भिज्जा:) 'उद्भिज' – भूमि को फाड़कर उगने वाले कहाते हैं। इनमें - (फलपाकान्ता) फल आने पर पककर सूख जाने वाले और (बहुपुष्पफलोपगा:) जिन पर बहुत फूल-फल लगते हैं, वे 'प्रोषधि' कहलाते हैं॥४६॥