Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 45 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 45

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 45
Shloka
स्वेदजं दंशमशकं यूकामक्षिकमत्कुणम्। ऊष्मणश्चोपजायन्ते यच्चान्यत्किं चिदीदृषम्॥
Pada
स्वेदजं। दंश-मशकं। यूका-मक्षिक-मत्कुणम्। ऊष्मणश्। च-उपजायन्ते। यच्। च-अन्यत्। किं। चिद्। ईदृषम्।

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Subject
स्वेदज-जीव
Meaning
(दंशमशकम्) डंक से काटने वाले मच्छर आदि (यूका) जू (मक्षिक) मक्खियां (मत्कुरणम्) खटमल (यत् च अन्यत् किश्चित् ईदृशम्) जो और भी कोई इस प्रकार के जीव हैं जो (ऊष्मणः) ऊष्मा अर्थात् सीलन और गर्मी से (उपजायन्ते) पैदा होते हैं, वे सब (स्वेदजम्) 'स्वेदज' अर्थात् पसीने से उत्पन्न होनेवाले कहाते हैं ॥४५॥