Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 44 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 44

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 44
Shloka
अण्डाजाः पक्षिणः सर्पा नक्रा मत्स्याश्च कच्छपाः। यानि चैवंः प्रकाराणि स्थलजान्यौदकानि च॥
Pada
अण्डाजाः। पक्षिणः। सर्पा। नक्रा। मत्स्याश्। च। कच्चपाः। यानि। च-एवं-प्रकाराणि। स्थलजान्यौदकानि। च।

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Subject
अण्डज-जीव
Meaning
(पक्षिरण:) पक्षी (सर्पा:) सांप (नक्रा:) मगरमच्छ (मत्स्याः) मछलियां (च) तथा (कच्छपा:) कछुए (च) और (यानि) अन्य जो (एवं प्रकारारिण) इस प्रकार के (स्थलजानि) भूमि पर रहने वाले (च) और (औदकानि) जल में रहने वाले जीव हैं, वे सब. (अण्डजा:) 'अण्डज' अर्थात् अण्डे से उत्पन्न होने वाले हैं॥४४॥