Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 43 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 43

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 43
Shloka
पशवश्च मृगाश्चैव व्यालाश्चोभयतोदतः। रक्षांसि च पिशाचाश्च मनुष्याश्च जरायुजाः॥
Pada
पशवश्। च। मृगाश्। च-एव। व्यालाश्। च-उभयतोदतः। रक्षांसि। च। पिशाचाश्। च। मनुष्याश्। च। जरायुजाः।

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Subject
जरायुज-जीव
Meaning
(पशव:) राम्यपशु गौ आदि (मृगाः) अहिंसक वृत्ति वाले वन्यपशु हिरण आदि (च) और (उभयोदतः व्यालाः) दोनों ओर दांत वाले हिंसक वृत्तिवाले पशु सिंह, व्याघ्र आदि (च) तथा (रक्षांसि) राक्षस (पिशाचा:) पिशाच (च) तथा (मनुष्य) (जरायुजाः) ये सब 'जरायुज' अर्थात् झिल्ली से पैदा होने वाले हैं॥४३॥