Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 30 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 30

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 30
Shloka
यथा र्तुलिङ्गान्यृतवः स्वयं एव र्तुपर्यये। स्वानि स्वान्यभिपद्यन्ते तथा कर्माणि देहिनः॥
Pada
यथा-ऋतु-लिङ्गान्य॒तवः। स्वयम्। एख-ऋतुपर्यये। स्वानि। स्वान्यभिपद्यन्ते। तथा। कर्माणि। देहिनः।

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Meaning
(यथा) जैसे (ऋतव:) ऋतुएं (ऋतुपये) ऋतु परिवर्तन होने पर (स्वयम् एव) अपने आप ही (ॠतुलिंगानि) अपने-अपने ऋतुचिह्नों - जैसे, वसन्त आने पर कुसुम-विकास, प्राम्रमञ्जरी आदि को (अभिपद्यन्ते) प्राप्त करती हैं (तथा) उसी प्रकार (देहिनः) देहधारी प्राणी भी (स्वानि स्वानि कर्माणि) अपने-अपने कर्मों को प्राप्त करते हैं॥३०॥