Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 29 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 29

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 29
Shloka
हिंस्राहिंस्रे मृदुक्रूरे धर्माधर्मावृतानृते। यद्यस्य सोऽदधात्सर्गे तत्तस्य स्वयं आविशत्॥
Pada
हिंस्र-अहिंस्र। मृदु-क्रूरे। धर्म-अधर्माद्। ऋत-अनृते। यद्। यस्य। सो। अदधात्। सर्गे। तत्। तस्य। स्वयम्। आविशत्।

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Meaning
(हिस्र-ग्रहित्रे) हिंसा [ सिंह, व्याघ्र आदि का ] अहिंसा [मृग आदि का] (मृदु-क्र रे) दयायुक्त और कठोरतायुक्त (धर्म-प्रधमो) धर्मं तथा अधर्म (अनृतऋते) असत्य और सत्य (यस्य) जिस प्राणी का (यत्) जो कर्म (सर्गे) सृष्टि के प्रारम्भ में (स: अदधात्) उस परमात्मा ने धारण कराना था (तस्य तत्) उसको वही कर्म (स्वयम्) अपने आप ही (आविशत्) प्राप्त हो गया॥२६॥