Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 28 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 28

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 28
Shloka
यं तु कर्मणि यस्मिन्स न्ययुङ्क्त प्रथमं प्रभुः। स तदेव स्वयं भेजे सृज्यमानः पुनः पुनः॥
Pada
यं। तु। कर्मणि। यस्मिन्। स। न्ययुङ्ग। प्रथमं। प्रभुः। स। तद्। एव। स्वयं। भेजे। सृज्यमानः। पुनः। पुनः।

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1 Bhashyas
Subject
जीवों का कर्मों से संयोग
Meaning
(सः प्रभुः) उस परमात्मा ने (प्रथमम्) सृष्टि के आरम्भ में (यं तु) जिस प्राणी को (यस्मिन् कर्मणि) जिस कर्म में (न्ययुङ्क्त) लगाया (सः) वह फिर (पुनः पुनः) बार-बार (सृज्यमानः) उत्पन्न होता हुआ (तदेव) उसी कर्म को ही (स्वयम्) अपने आप (भेजे) प्राप्त करने लगा॥२८॥