Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 27 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 27

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 27
Shloka
अण्व्यो मात्रा विनाशिन्यो दशार्धानां तु याः स्मृताः। ताभिः सार्धं इदं सर्वं संभवत्यनुपूर्वशः॥
Pada
अण्व्यो। मात्रा। विनाशिन्यो। दशार्धानां। तु। याः। स्मृताः। ताभिः। सार्धम्। इदं। सर्वं। संभवत्यनुपूर्वशः।

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Subject
सूक्ष्म से स्थूल के क्रम से सृष्टि का वर्णन
Meaning
(दशार्धानाम् तु) दश के आधे अर्थात् पांच महाभूतों की ही (याः) जो (विनाशिन्यः) विनाशशील अर्थात् अपने अहङ्कार कारण में लीन होकर नष्ट होने के स्वभाव वाली (अण्व्यः मात्राः स्मृताः) सूक्ष्म तन्मात्राएं कही गई हैं (ताभिः) उनके (सार्धं) साथ अर्थात् उनको मिलाकर ही (इदं सर्वम्) यह समस्त संसार (अनुपूर्वंश:) क्रमश:– सूक्ष्म से स्थूल, स्थूल से स्थूलतर, स्थूलतर से स्थूलतम के क्रम से (संभवति) उत्पन्न होता है॥२७॥