Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 26 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 26

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 26
Shloka
कर्मणां च विवेकार्थं धर्माधर्मौ व्यवेचयत्। द्वन्द्वैरयोजयच्चेमाः सुखदुःखादिभिः प्रजाः॥
Pada
कर्मणां। च। विवेकार्थं। धर्म-अधर्मी। व्यवेचयत्। द्वन्द्वैर। अयोजयच्। च-इमाः। सुख-दुःखादिभिः। प्रजाः।

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Subject
धर्म-अधर्म सुख दुःख आदि का विभाग
Meaning
(च) और फिर (कर्मणां विवेकार्थम्) कर्मों के विवेचन के लिए (धर्मअधम) धर्म धर्म का (व्यवेचयत्) विभाग किया (च) तथा (इमा: प्रजाः) इन प्रजाओं को (सुखदुःखादिभिः द्वन्द्वः) सुख-दुःख आदि द्वन्द्वों [ = दो विरोधी गुणों या अवस्थाओं के जोड़ों] से (अयोजयत्) संयुक्त किया॥२६॥