Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 23 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 23

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 23
Shloka
अग्निवायुरविभ्यस्तु त्रयं ब्रह्म सनातनम्। दुदोह यज्ञसिद्ध्यर्थं ऋग्यजुःसामलक्षणम्॥
Pada
अग्नि-वायु-रविभ्यस्। तु। त्रयं। ब्रह्म। सनातनम्। दुदोह। यज्ञसिद्धि-अर्थम्। ऋच्-यजुस्-साम-लक्षणम्।

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Subject
वेदों का आविर्भाव
Meaning
उस परमात्मा ने (यज्ञसिद्धयर्थम्) जगत् में समस्त धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष आदि व्यवहारों की सिद्धि के लिए अथवा जगत् की सिद्धि अर्थात् जगत् के समस्त रूपों के ज्ञान के लिए [यज्ञे जगति प्राप्तव्या सिद्धिः यज्ञसिद्धिः, अथवा यज्ञस्य सिद्धिः यज्ञसिद्धिः ] (अग्नि-वायु-रविभ्य: तु) अग्नि, वायु और रवि से (ऋग्यजु: सामलक्षणं, त्रयं सनातनं ब्रह्म) ऋग् = ज्ञान, यजुः = कर्म, साम= उपासना रूप त्रिविध ज्ञान वाले नित्य वेदों को (दुदोह) दुहकर प्रकट किया॥२३॥