Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 22 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 22

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 22
Shloka
कर्मात्मनां च देवानां सोऽसृजत्प्राणिनां प्रभुः। साध्यानां च गणं सूक्ष्मं यज्ञं चैव सनातनम्॥
Pada
कर्मात्मनां। च। देवानां। सो। असृजत्। प्राणिनां। प्रभुः। साध्यानां। च। गणं। सूक्ष्मं। यज्ञं। च-एव। सनातनम्।

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1 Bhashyas
Subject
उपसंहार रूप में समस्त जगत् की उत्पत्ति का वर्णन
Meaning
[ इस प्रकार १ । ५- १२ श्लोकों में वर्णित प्रक्रिया के अनुसार ] (सः प्रभुः) उस परमात्मा ने (कर्मात्मनां च देवानाम्) कर्म ही स्वभाव है जिनका ऐसे सूर्य, अग्नि, वायु आदि देवों के (प्राणिनाम्) मनुष्य, पशु पक्षी आदि सामान्य प्राणियों के (च) और (साध्यानाम्) साधक कोटि के विशेष विद्वानों के (गरणम्) समुदाय को [१ | २३ में वर्णित ] (च) तथा (सनातनं सूक्ष्मं यज्ञम् एव) सृष्टि-उत्पत्ति काल से प्रलयकाल तक निरन्तर प्रवाहमान सूक्ष्म संसार अर्थात् महत् अहङ्कार पश्चतन्मात्रा आदि सूक्ष्म रूपमय और सूक्ष्मशक्तियों से युक्त संसार को (असृजत्) रचा॥२२॥