Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 21 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 21

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 21
Shloka
सर्वेषां तु स नामानि कर्माणि च पृथक्पृथक्। वेदशब्देभ्य एवादौ पृथक्संस्थाश्च निर्ममे॥
Pada
सर्वेषां। तु। स। नामानि। कर्माणि। च। पृथक्। पृथक्। वेदशब्देभ्य। एव-अदौ। पृथक्। संस्थाश्। च। निर्ममे।

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1 Bhashyas
Subject
वेदशब्दों से नामकरण एवं विभाग-
Meaning
(सः) उस परमात्मा ने (सर्वेषां तु नामानि) सब पदार्थों के नाम [ यथागो-जाति का 'गो', अश्वजाति का 'अश्व' आदि] (च) और (पृथक्-पृथक् कर्मारिण) भिन्न-भिन्न कर्म [यथा --ब्राह्मरण के वेदाध्यापन, याजन क्षत्रिय का रक्षा करना वैश्य का कृषि, गोरक्षा, व्यापार आदि [१ । ८७ - ६१] अथवा मनुष्य तथा अन्य प्राणियों के हिंस्र-अहिंस्र आदि कर्म (१ | २६-३०)] (च) तथा (पृथक् संस्था:) पृथक्-पृथक् विभाग [जैसे— प्राणियों में मनुष्य, पशु, पक्षी आदि (१ । ४२–४६) ] या व्यवस्थाएं [ यथा- चारवर्गों की व्यवस्था (११३१, १ । ८७–९१)] (आदौ) सृष्टि के प्रारम्भ में (वेदशब्देभ्य: एव) वेदों के शब्दों से ही (निर्ममे) वनायीं॥२१॥