Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 20 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 20

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 20
Shloka
आद्याद्यस्य गुणं त्वेषां अवाप्नोति परः परः। यो यो यावतिथश्चैषां स स तावद्गुणः स्मृतः॥
Pada
आद्याद्यस्य। गुणं। त्व्। एषाम्। अवाप्नोति। परः। परः। यो। यो। यावतथश्। च-एषां। स। स। तावद्। गुणः। स्मृतः।

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
पञ्चमहाभूतों के गुणों का कथन
Meaning
(एषाम्) इन [२० वें में चर्चित] पश्चमहाभूतों में (आद्य-आद्यस्य गुणं तु) पूर्व-पूर्व के भूतों के गुरण को (परः परः) परला-परला अर्थात् उत्तरोत्तर बाद में आने वाला भूत प्राप्त करता है (च) और (यः यः) जो-जो भूत (यावतिथं:) जिस संख्या पर स्थित है (सः सः) वह वह (तावद्गुणः) उतने ही अधिक गुणों से युक्त (स्मृतः) माना गया है ।। २० ।।