Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 2 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 2

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 2
Shloka
भगवन्सर्ववर्णानां यथावदनुपूर्वशः। अन्तरप्रभवानां च धर्मान्नो वक्तुं अर्हसि॥
Pada
भगवन्। सर्ववर्णानां। यथावद्। अनुपूर्वशः। अन्तरप्रभवानां। च। धर्मान्। नो। वक्तुम्। अर्हसि।

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Subject
महर्षियों का मनु से वर्णाश्रम धर्मों के विषय में प्रश्न
Meaning
(भगवन्) हे भगवन् ! आप (सर्ववर्णानाम्) सब वर्गों=ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शुद्र (च) और (अन्तरप्रभवाणाम्) सभी वर्गों के अन्दर होने वाले अर्थात् आश्रमों- ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास के [वर्णानां अन्तरे प्रभवःउत्पत्तिः, स्थितिः येषां ते अन्तरप्रभवाः = आश्रमा:] (धर्मान्) धर्म-कर्त्तव्यों को (यथावत्) ठीक-ठीक रूप से (अनुपूर्वंश:) और क्रमानुसार अर्थात् वर्णों को ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र के क्रम से तथा आश्रमों को ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास के क्रम से (नः) हमें (वक्तुम्) बतलाने में (अहंसि) समर्थ हो॥२॥