Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 16 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 16

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 16
Shloka
तेषां त्ववयवान्सूक्ष्मान्षण्णां अप्यमितौजसाम्। संनिवेश्यात्ममात्रासु सर्वभूतानि निर्ममे॥
Pada
तेषां। त्व्। अवयवान्। सूक्ष्मान्। षण्णाम्। अप्यमित-ओजसाम्। संनिवेश्य-अत्ममात्रासु। सर्वभूतानि। निर्ममे।

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Subject
पञ्चमहाभूतों की सृष्टि का वर्णन
Meaning
(तेषां तु) ऊपर [१४, १५] वर्णन किये गये उन तत्त्वों में से (अमितप्रौज़साम्) अनन्त शक्तिवाले (षण्णां अपि) छहों तत्त्वों के (सूक्ष्मान् अवयवान्) सूक्ष्म अवयवों [शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध ये पांच तन्मात्रायें तथा छठे अहङ्कार के सूक्ष्म अवयवों] को (आत्ममात्रासु) उनके आत्मभूत तत्त्वों के विकारी अंशों अर्थात् कारणों में मिलाकर (सर्वभूतानि) सब पांचों महाभूतोंआकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी को (निर्म) सृष्टि की॥१६॥