Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 143 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 143

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 143
Shloka
एताण् द्विजातयो देशान्संश्रयेरन्प्रयत्नतः। शूद्रस्तु यस्मिन्कस्मिन्वा निवसेद्वृत्तिकर्शितः॥

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Meaning
(द्विजातयः) द्विजाति अर्थात् ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य लोग (एतान् प्रयत्नः संश्रयेरन्) इन उपर्युक्त देशों में प्रयत्न करके आश्रय ग्रहण करेंनिवास करें (वृत्तिकशितः शुद्रः तु) जीविका के प्रभाव से पीड़ित शूद्र तो (यस्मिन् कस्मिन् वा निवसेत्) जिस किसी देश में जाकर निवास कर सकता है॥१४३॥