Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 142 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 142

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 142
Shloka
कृष्णसारस्तु चरति मृगो यत्र स्वभावतः। स ज्ञेयो यज्ञियो देशो म्लेच्छदेशस्त्वतः परः॥

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Subject
यज्ञिय और म्लेच्छ देश
Meaning
(यत्र) जिस देश में (स्वभावत: कृष्णसार : चरति) स्वाभाविक रूप से ही काला मृग विचरण करता है (सः यज्ञियः देश: ज्ञेयः) वह यज्ञों से सुशोभित अथवा पवित्र देश जानना चाहिए, (अतः परः म्लेच्छदेश:) इससे भिन्न 'म्लेच्छ देश' है ।। १४२ ।।