Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 134 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 134

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 134
Shloka
उदितेऽनुदिते चैव समयाध्युषिते तथा। सर्वथा वर्तते यज्ञ इतीयं वैदिकी श्रुतिः॥

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Meaning
(उदिते) सूर्योदय के समय (अनुदि) और सूर्यास्त के समय (तथा) तथा (समयाध्युषिते) किसी भी निर्धारित किये समय में [जैसे विशेष उपलक्ष्य में आयोजित यज्ञ] (सर्वथा यज्ञ वर्तते) सब स्थितियों में यज्ञ कर लेना चाहिए (इति इयं वैदिकी श्रुतिः) इस प्रकार ये तीनों ही वैदिक वचन हैं अर्थात् ये तीनों ही धर्म हैं ।। १३४ ।।1.136 ब्रह्मावर्त्त देश की सीमा (सरस्वती - दृषद्वत्योः देवनद्योः) सिन्धु और ब्रह्मपुत्र इन देवनदियों के (यत् अन्तरम्) जो अन्तराल = मध्यवर्तीका भाग है, (तं देवनिर्मितं देशम्) उस विद्वानों द्वारा बसाये देश को (ब्रह्मावर्त प्रचक्षते) 'ब्रह्मावर्त' कहा जाता है ॥१३६॥