Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 133 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 133

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 133
Shloka
श्रुतिद्वैधं तु यत्र स्यात्तत्र धर्मावुभौ स्मृतौ। उभावपि हि तौ धर्मौ सम्यगुक्तौ मनीषिभिः॥

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Meaning
(यत्र तु श्रुतिद्वैधं स्यात्) जहाँ कहीं श्रुति = वेद में दो पृथक् विहित हों (तत्र) ऐसे स्थलों पर (उभौ) वे दोनों ही विधान (धर्मों स्मृतौ) धर्म माने हैं (मनीषिभिः) मनीषी विद्वानों ने (तौ उभौ अपि सम्यक् धर्मों उक्तौ) उन दोनों को ही श्रेष्ठ धर्म स्वीकार किया है ॥१३३॥