Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 128 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 128

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 128
Shloka
श्रुतिस्मृत्युदितं धर्मं अनुतिष्ठन्हि मानवः। इह कीर्तिमवाप्नोति प्रेत्य चानुत्तमं सुखम्॥

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Subject
श्रुति-स्मृति-प्रोक्त धर्म के अनुष्ठान का पात्र
Meaning
(हि) क्योंकि (मानव:) जो मनुष्य (श्रुति-स्मृति - उदितम्) वेदोक्त धर्म और जो वेद से अविरुद्ध स्मृत्युक्त (धर्मम् अनुतिष्ठन्) धर्म का अनुष्ठान करता है, वह (इह कीत्ति च प्रेत्य अनुत्तमं सुखम्) इस लोक में कीति और मरके सर्वोत्तम सुख को (अवाप्नोति) प्राप्त होता है॥१२८॥