Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 127 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 127

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 127
Shloka
सर्वं तु समवेक्ष्येदं निखिलं ज्ञानचक्षुषा। श्रुतिप्रामाण्यतो विद्वान्स्वधर्मे निविशेत वै॥

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Meaning
(विद्वान्) [विद्वान्] मनुष्य (इदं सर्वं तु निखिलं समवेक्ष्य) सम्पूर्ण शास्त्र वेद, सत्पुरुषों का आचार, अपने आत्मा के अविरुद्ध विचार कर [१ | १२५ में वर्णित] (ज्ञानचक्षुषा) ज्ञान नेत्र करके (श्रुतिप्रामाण्यतः) श्रुतिप्रमाण से (स्वधर्मे वै निविशेत) स्वात्मानुकूल धर्म में प्रवेश करे ॥१२७॥