Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 122 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 122

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 122
Shloka
संकल्पमूलः कामो वै यज्ञाः संकल्पसंभवाः। व्रतानि यमधर्माश्च सर्वे संकल्पजाः स्मृताः॥

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Meaning
(जो कोई कहे कि मैं निष्काम हूँ वा हो जाऊं तो वह कभी नहीं हो सकता, क्योंकि-) (सर्वे) सब काम (यज्ञा: व्रतानि यमधर्मा:) यज्ञ, सत्यभाषरणादि व्रत, यम-नियमरूपी धर्म आदि (संकल्प्रजा:) संकल्प ही से बनते हैं [(काम: वै) निश्चय से प्रत्येक कामना (संकल्पमूलः) संकल्पमूलक होती है अर्थात् संकल्प से ही प्रत्येक इच्छा उत्पन्न होती है]॥१२२॥