Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 120 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 120

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 120
Shloka
विद्वद्भिः सेवितः सद्भिर्नित्यमद्वेषरागिभिः। हृदयेनाभ्यनुज्ञातो यो धर्मस्तं निबोधत॥

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Subject
धर्म का सामान्य लक्षण
Meaning
(अद्वेषरागिभिः सद्भिः विद्वद्भिः नित्यं सेवितः) जिसका सेवन रागद्वेषरहित [श्रेष्ठ] विद्वान् लोग नित्य करें (यो हृदयेन अभ्यनुज्ञातः धर्मः) जिसको हृदय अर्थात् आत्मा से सत्य कर्त्तव्य जाने वही धर्म माननीय और करणीय है । * (तं निबोधत) उसे सुनो ॥१२०॥