Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 110 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 110

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 110
Shloka
एवं आचारतो दृष्ट्वा धर्मस्य मुनयो गतिम्। सर्वस्य तपसो मूलं आचारं जगृहुः परम्॥
Pada
एवम्। आचारतो। दृष्ट्वा। धर्मस्य। मुनयो। गतिं। सर्वस्य। तपसो। मूलम्। आचारं। जगृहुः। परम्।

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Meaning
(एवम्) इस प्रकार (आचारतः) धर्माचरण से ही (धर्मस्य) धर्म की (गतिम्) प्राप्ति एवं अभिवृद्धि (दृष्ट्वा) देखकर (मुनयः) मुनियों ने (सर्वस्य तपसः परं मूलम्) सब तपस्याओं का श्रेष्ठ मूल आधार (आचारम्) धर्माचरण को ही (जगृहु:) स्वीकार किया है॥११०॥