Adhyay 1

Manusmriti

Shloka 109 Chapter One

Adhyay 1
Shloka 109

Chapter One

Subject: सृष्टि-उत्पत्ति एवं धर्मोत्पत्ति विषय

144 Shloka
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Adhyay 1 Shloka 109
Shloka
आचाराद्विच्युतो विप्रो न वेदफलं अश्नुते। आचारेण तु संयुक्तः सम्पूर्णफलभाज्भवेत्॥
Pada
आचाराद्। विच्युतो। विप्रो। न। वेदफलम्। अश्नुते। आचारेण। तु। संयुक्तः। सम्पूर्णफलभाज्। भवेत्।

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1 Bhashyas
Meaning
(आचारात् विच्युतः विप्रः) जो धर्माचरण से रहित [ द्विज ] है वह (वेदफलं न अश्नुते) वेद प्रतिपादित धर्मजन्य सुखरूप फल को प्राप्त नहीं हो सकता, और जो (आचारेण तु संयुक्तः) विद्या पढ़ के धर्माचरण करता है, वही (सम्पूर्णफलभाक् भवेत्) सम्पूर्ण सुख को प्राप्त होता है ।।१०९।।