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Atharvaveda - Mantra 12

Atharvaveda 9/8/12

10 Sukta
22 Mantra
9/8/12
Devata- सर्वशीर्षामयापाकरणम् Rishi- भृग्वङ्गिराः Chhanda- अनुष्टुब्गर्भा ककुम्मती चतुष्पदोष्णिक् Suktam- यक्ष्मनिवारण सूक्त
Mantra with Swara
उ॒दरा॑त्ते क्लो॒म्नो नाभ्या॒ हृद॑या॒दधि॑। यक्ष्मा॑णां॒ सर्वे॑षां वि॒षं निर॑वोचम॒हं त्वत् ॥

उ॒दरा॑त् । ते॒ । क्लो॒म्न: । नाभ्या॑: । हृद॑यात् । अधि॑ । यक्ष्मा॑णम् । सर्वे॑षाम् । वि॒षम् । नि: । अ॒वो॒च॒म् । अ॒हम् । त्वत् ॥१३.१२॥

Mantra without Swara
उदरात्ते क्लोम्नो नाभ्या हृदयादधि। यक्ष्माणां सर्वेषां विषं निरवोचमहं त्वत् ॥

उदरात् । ते । क्लोम्न: । नाभ्या: । हृदयात् । अधि । यक्ष्माणम् । सर्वेषाम् । विषम् । नि: । अवोचम् । अहम् । त्वत् ॥१३.१२॥

Meaning
१. (बलास:) = शरीर के बल का नाशक कफ़-रोग (आस:) = बाहर फेंका हुआ (भवतु) = हो थूक के रूप में बाहर फेंक दिया जाए। (आमयत्) = रोगकारी पदार्थ (मूत्रं भवतु) = मूत्ररूप होकर बाहर आ जाए। (सर्वेषाम्) = सब (यक्ष्माणाम्) = रोगों के (विषम्) = विष को (अहम्) = मैं (त्वत्) = तेरे शरीर से (निर् अवोचम्) = बाहर निकालकर बताऊँ, अर्थात् तुझे नीरोग कर दूँ। २. (तव उदरात्) = तेरे उदर से (काहाबाहम्) = खाँसी आदि को लानेवाला (बिलम्) = फूटन रोग [कास आव] अङ्गों को कड़ कड़ानेवाला रोग (बहिः निर्द्रवतु) = बाहर निकल जाए। (ते उदरात्) = तेरे उदर से (क्लोन:) = कलेजे से, (नाभ्या:) = नाभि से और (हृदयात् अधि) = हदय से भी सब रोगों के विष को मैं तेरे शरीर से बाहर कर दूँ।
Essence
कफ़-रोग थूक के रूप में, अन्य रोगकारी पदार्थ मूत्र के रूप में शरीर से पृथक् हो जाएँ। खाँसी करनेवाला फूटन रोग भी शरीर से पृथक् हो जाए। हमारा उदर, क्लोम, नाभि व हृदय सब स्वस्थ हों।
Subject
सर्वाङ्ग नीरोगता

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