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Atharvaveda - Mantra 6

Atharvaveda 9/7/6

10 Sukta
26 Mantra
9/7/6
Devata- गौः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- आसुरी गायत्री Suktam- गौ सूक्त
Mantra with Swara
दे॒वानां॒ पत्नीः॑ पृ॒ष्टय॑ उप॒सदः॒ पर्श॑वः ॥

दे॒वाना॑म् । पत्नी॑: । पृ॒ष्टय॑: । उ॒प॒ऽसद॑: । पर्श॑व: ॥१२.६॥

Mantra without Swara
देवानां पत्नीः पृष्टय उपसदः पर्शवः ॥

देवानाम् । पत्नी: । पृष्टय: । उपऽसद: । पर्शव: ॥१२.६॥

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Meaning
१. (वायुः विश्वम्) = वायु उसके सब अवयव हैं। (स्वर्ग: लोक:) = स्वर्गलोक (कृष्णद्रम्) = आकर्षक गति है [कृष्ण हु], विधरणी लोकों को पृथक्-पृथक् स्थापित करनेवाली शक्ति (निवेष्यः) = उसका बैठने का कूल्हा है। २. (श्येन:) = श्येनयाग (क्रोड:) = उसका गोद-भाग है, (अन्तरिक्षम्) = अन्तरिक्ष (पाजस्यम्) = पेट है, (ब्रहस्पतिः ककुद्) = बृहस्पति उसका ककुद है। (बृहती:) = ये विशाल दिशाएँ (कीकसा:) = उसके गले के मोहरे हैं। ३. (देवानां पत्नी:) = 'सूर्या, इन्द्राणी, वरुणानी, अग्नाणी' आदि देवपलियाँ (पृष्टयः) = पृष्ठ के मोहरे, (उपसदः) = उपसद इष्टियाँ (पर्शवः) = उसकी पसलियाँ हैं।
Essence
वेदवाणी में प्रभु के बनाये हुए वायु आदि पदार्थों के ज्ञान के साथ कर्तव्यभूत उपसद आदि इष्टियों का भी प्रतिपादन किया गया है।
Subject
वायु से उपसद तक