Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 13

Atharvaveda 9/5/13

10 Sukta
38 Mantra
9/5/13
Devata- अजः पञ्चौदनः Rishi- भृगुः Chhanda- त्रिष्टुप् Suktam- अज सूक्त
Mantra with Swara
अ॒जो ह्यग्नेरज॑निष्ट॒ शोका॒द्विप्रो॒ विप्र॑स्य॒ सह॑सो विप॒श्चित्। इ॒ष्टं पू॒र्तम॒भिपू॑र्तं॒ वष॑ट्कृतं॒ तद्दे॒वा ऋ॑तु॒शः क॑ल्पयन्तु ॥

अ॒ज: । हि । अ॒ग्ने: । अज॑निष्ट । शोका॑त् । विप्र॑: । विप्र॑स्य । सह॑स: । वि॒प॒:ऽचित् । इ॒ष्टम् । पू॒र्तम् । अ॒भिऽपू॑र्तम् । वष॑ट्ऽकृतम् । तत् । दे॒वा: । ऋ॒तु॒ऽश: । क॒ल्प॒य॒न्तु॒ ॥५.१३॥

Mantra without Swara
अजो ह्यग्नेरजनिष्ट शोकाद्विप्रो विप्रस्य सहसो विपश्चित्। इष्टं पूर्तमभिपूर्तं वषट्कृतं तद्देवा ऋतुशः कल्पयन्तु ॥

अज: । हि । अग्ने: । अजनिष्ट । शोकात् । विप्र: । विप्रस्य । सहस: । विप:ऽचित् । इष्टम् । पूर्तम् । अभिऽपूर्तम् । वषट्ऽकृतम् । तत् । देवा: । ऋतुऽश: । कल्पयन्तु ॥५.१३॥

Meaning
१. (अग्ने:) = प्रकाशमय अग्रणी प्रभु की (शोकात्) = दीप्ति से यह उपासक भी (हि) = निश्चय से (अजः अजनष्टि) = गति के द्वारा बुराई को परे फेंकनेवाला बनता है। प्रभु की दीसि इसके जीवन को पवित्र बना डालती है। यह (विप्रस्य) = [वि+प्रा] विशेषरूप से पूरण करनेवाले प्रभु के (सहस:) = बल से (विप्रः) = अपना पूरण करनेवाला (विपश्चित) = ज्ञानी बनता है। २. यह 'अज, विप्र, विपश्चित्' गति-[कर्म]-शील, अपना पूरण करनेवाला [उपासना], ज्ञानी [ज्ञान] देव बनता है। ये (देवा:) = देव (वषट् कृतम्) = जिसमें स्वार्थ की आहुति दे दी जाती है, (तत् इष्टम्) = उस यज्ञ को तथा (अभिपूर्तम्) = मनुष्यों व पशु-पक्षियों-दोनों के पूरण करनेवाले (पूर्तम्) = वापी, कूप तड़ागादि के निर्माणरूप कार्य को (ऋतुश:) = प्रत्येक ऋतु में-ऋतु की आवश्यकता के अनुसार (कल्पयन्तु) = सिद्ध करें। इष्ट व पूर्त के द्वारा ये संसार को सुखमय बनाने के लिए यनशील हों।
Essence
प्रभु की दीप्ति जीवों को 'अज'-गति द्वारा बुराई को परे फेंकनेवाला बनाती है। 'सर्वतः पूर्ण प्रभु की शक्ति से यह जीव पूर्ण व ज्ञानी [विप्र-विपश्चित्] बनता है। इन देवपुरुषों को चाहिए कि ऋतु के अनुसार 'इष्ट और पूर्त' को सिद्ध करते हुए संसार का पूरण करें इसे सुखमय बनाएँ।
Subject
अज, विप्र, विपश्चित्

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.