Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 8

Atharvaveda 9/4/8

10 Sukta
24 Mantra
9/4/8
Devata- ऋषभः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- भुरिक्त्रिष्टुप् Suktam- ऋषभ सूक्त
Mantra with Swara
इन्द्र॒स्यौजो॒ वरु॑णस्य बा॒हू अ॒श्विनो॒रंसौ॑ म॒रुता॑मि॒यं क॒कुत्। बृह॒स्पतिं॒ संभृ॑तमे॒तमा॑हु॒र्ये धीरा॑सः क॒वयो॒ ये म॑नी॒षिणः॑ ॥

इन्द्र॑स्य । ओज॑: । वरु॑णस्य । बा॒हू इति॑ । अ॒श्विनो॑: । अंसौ॑ । म॒रुता॑म् । इ॒यम् । क॒कुत् । बृह॒स्पति॑म् । सम्ऽभृ॑तम् । ए॒तम् । आ॒हु॒: । ये । धीरा॑स: । क॒वय॑: । ये । म॒नी॒षिण॑: ॥४.८॥

Mantra without Swara
इन्द्रस्यौजो वरुणस्य बाहू अश्विनोरंसौ मरुतामियं ककुत्। बृहस्पतिं संभृतमेतमाहुर्ये धीरासः कवयो ये मनीषिणः ॥

इन्द्रस्य । ओज: । वरुणस्य । बाहू इति । अश्विनो: । अंसौ । मरुताम् । इयम् । ककुत् । बृहस्पतिम् । सम्ऽभृतम् । एतम् । आहु: । ये । धीरास: । कवय: । ये । मनीषिण: ॥४.८॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. वे प्रभु (इन्द्रस्य) = जितेन्द्रिय पुरुष का (ओज:) = बल हैं, जितेन्द्रिय पुरुष में बल के रूप में रहते हैं, (वरुणस्य) = पाप से अपना निवारण करनेवाले की (बाहू) = भुजाएँ हैं [बाह प्रयले]। वस्तुत: प्रभु से ही उसे पापनिवारक शक्ति प्राप्त होती है। (अश्विनो:) = कर्मों में व्याप्त [अश् व्याप्तौ] रहनेवाले पति-पत्नी के वे प्रभु (अंसौ) = कन्धों के समान हैं। प्रभुकृपा से ही वे कर्मव्याप्त पति पत्नी अपने कन्धों पर गृहस्थ-भार को उठाने में समर्थ होते हैं। (मरुताम्) = [मरुतः प्राणाः, मितराविण:] प्राणसाधक व मितभाषी-कर्मशूर पुरुषों के (इयं ककुत्) = ये प्रभु शिखर हैं, अर्थात् इन्हें वे शिखर पर पहुँचानेवाले हैं। २. (एतम्) = इस प्रभु को (बृहस्पतिम्) = आकाश आदि सब बड़े बड़े लोकों का स्वामी तथा (संभृतम्) = उनका सम्यक् भरण करनेवाला (आहुः) = कहते हैं। (ये) = जोकि (धीरास:) = धीर है [धी ईर], बुद्धिपूर्वक गति करनेवाले हैं, (कवय:) = क्रान्तदर्शी, तत्त्वदर्शी हैं व (मनीषिण:) = [मनसः ईशते] मन का शासन करनेवाले हैं, वे पुरुष प्रभु को ऐसा ही कहते हैं।
Essence
प्रभु ही सब लोक-लोकान्तरों के स्वामी व सम्यक भरण करनेवाले हैं। वे जितेन्द्रिय पुरुष को शक्ति देते हैं, पाप-निवारण की वृत्तिवाले को पाप-निवारण में समर्थ करते हैं, कर्मव्याप्त पति-पत्नी को गृहस्थ-भार उठाने में समर्थ करते हैं तथा प्राणसाधक मितरावी पुरुषों को शिखर पर पहुँचाते हैं।'धीर, कवि व मनीषी' प्रभु को इसी रूप में देखते हैं।
Subject
धीरासः, कवयः, मनीषिणः