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Atharvaveda - Mantra 2

Atharvaveda 9/4/2

10 Sukta
24 Mantra
9/4/2
Devata- ऋषभः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- त्रिष्टुप् Suktam- ऋषभ सूक्त
Mantra with Swara
अ॒पां यो अग्ने॑ प्रति॒मा ब॒भूव॑ प्र॒भूः सर्व॑स्मै पृथि॒वीव॑ दे॒वी। पि॒ता व॒त्सानां॒ पति॑र॒घ्न्यानां॑ साह॒स्रे पोषे॒ अपि॑ नः कृणोतु ॥

अ॒पाम् । य: । अग्ने॑ । प्र॒ति॒ऽमा । ब॒भूव॑ । प्र॒ऽभू: । सर्व॑स्मै । पृ॒थि॒वीऽइ॑व । दे॒वी । पि॒ता । व॒त्साना॑म् । पति॑: । अ॒घ्न्याना॑म् । सा॒ह॒स्रे । पोषे॑ । अपि॑ । न॒: । कृ॒णो॒तु॒ ॥४.२॥

Mantra without Swara
अपां यो अग्ने प्रतिमा बभूव प्रभूः सर्वस्मै पृथिवीव देवी। पिता वत्सानां पतिरघ्न्यानां साहस्रे पोषे अपि नः कृणोतु ॥

अपाम् । य: । अग्ने । प्रतिऽमा । बभूव । प्रऽभू: । सर्वस्मै । पृथिवीऽइव । देवी । पिता । वत्सानाम् । पति: । अघ्न्यानाम् । साहस्रे । पोषे । अपि । न: । कृणोतु ॥४.२॥

Meaning
१. (य:) = जो (अग्रे) = सृष्टि के आरम्भ में (अपाम्) = प्रजाओं का [आपो नारा इति प्रोक्ता:] (प्रतिमा  बभूव) = निर्माता [Maker, Creator] हुआ [महर्षयः सप्त, पूर्वे चत्वारे, मनवस्तथा। मभावा मनसा जाता येषां लोक इमा: प्रजाः ॥] वह (देवी पृथिवी इव) = इस दिव्य गुणोंवाली, सब पदार्थों को देनेवाली पृथिवी के समान (सर्वस्मै प्रभू:) = सबके लिए-सबको आधार देने के लिए समर्थ है। २. वह (वत्सानाम्) = [वदति] स्तवन करनेवालों का अथवा वेदवचनों का उच्चारण करनेवालों का (पिता) = रक्षक है। (अन्यानाम्) = अहन्तव्य वेदवाणियों के (पति:) = वे प्रभु स्वामी हैं। सब वेदवाणी प्रभु में ही निवास करती हैं। ये प्रभु साहले (पोषे-सहस्रों) = पराक्रमों से युक्त पोषण में (नः कृणोतु) = हमें करें, अर्थात् सब प्रकार से हमें पुष्ट करें।
Essence
प्रभु सर्गारम्भ में अमैथुनी सृष्टि को जन्म देते हैं, सबका धारण करते हैं, स्तोताओं के रक्षक हैं, वेदवाणियों के पति हैं। वे हमें सहस्रों प्रकार से पुष्ट करें।
Subject
अपां प्रतिमा

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