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Atharvaveda - Mantra 23

Atharvaveda 9/3/23

10 Sukta
31 Mantra
9/3/23
Devata- शाला Rishi- भृग्वङ्गिराः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- शाला सूक्त
Mantra with Swara
इ॒मा आपः॒ प्र भ॑राम्यय॒क्ष्मा य॑क्ष्म॒नाश॑नीः। गृ॒हानुप॒ प्र सी॑दाम्य॒मृते॑न स॒हाग्निना॑ ॥

इ॒मा: । आप॑: । प्र । भ॒रा॒मि॒ । अ॒य॒क्ष्मा: । य॒क्ष्म॒ऽनाश॑नी: । गृ॒हान् । उप॑ । प्र । सी॒दा॒मि॒ । अ॒मृते॑न । स॒ह । अ॒ग्निना॑ ॥३.२३॥

Mantra without Swara
इमा आपः प्र भराम्ययक्ष्मा यक्ष्मनाशनीः। गृहानुप प्र सीदाम्यमृतेन सहाग्निना ॥

इमा: । आप: । प्र । भरामि । अयक्ष्मा: । यक्ष्मऽनाशनी: । गृहान् । उप । प्र । सीदामि । अमृतेन । सह । अग्निना ॥३.२३॥

Meaning
१. (इमाः आप:) = इन जलों को जोकि (अयक्ष्मा:) = रोगरहित हैं-जिनमें किन्हीं रोगकृमियों के होने की आशंका नहीं है और जो (यक्ष्मनाशनी:) = रोगों का नाश करनेवाले हैं, उन जलों को (प्रभरामि) = मैं घर में प्रकर्षण प्राप्त कराता हूँ। २. मैं (गृहान्) = इन घरों को (उपप्रसीदामि) = समीपता से, प्रसन्नतापूर्वक प्राप्त होता हूँ-इन घरों में प्रसन्नतापूर्वक स्थित होता हूँ जोकि (अमृतेन अग्निना सह) = कभी न मरनेवाली-कभी न बुझनेवाली व नीरोगता प्राप्त करानेवाली यज्ञाग्नि के साथ है यज्ञाग्नि से युक्त हैं।
Essence
हमारे घर रोगनाशक जलों से युक्त हों तथा इन घरों में नीरोगता प्राप्त करानेवाली यज्ञाग्नि कभी बुझे नहीं।
Subject
अयक्ष्माः, आपः, अमृता अग्निः

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