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Atharvaveda - Mantra 21

Atharvaveda 9/3/21

10 Sukta
31 Mantra
9/3/21
Devata- शाला Rishi- भृग्वङ्गिराः Chhanda- आस्तारपङ्क्तिः Suktam- शाला सूक्त
Mantra with Swara
या द्विप॑क्षा॒ चतु॑ष्पक्षा॒ षट्प॑क्षा॒ या नि॑मी॒यते॑। अ॒ष्टाप॑क्षां॒ दश॑पक्षां॒ शालां॒ मान॑स्य॒ पत्नी॑म॒ग्निर्गर्भ॑ इ॒वा श॑ये ॥

या । द्विऽप॑क्षा । चतु॑:ऽपक्षा । षट्ऽप॑क्षा । या । नि॒ऽमी॒यते॑ । अ॒ष्टाऽप॑क्षाम् । दश॑ऽपक्षाम् । शाला॑म् । मान॑स्य । पत्नी॑म् । अ॒ग्नि: । गर्भ॑:ऽइव । आ । श॒ये॒ ॥३.२१॥

Mantra without Swara
या द्विपक्षा चतुष्पक्षा षट्पक्षा या निमीयते। अष्टापक्षां दशपक्षां शालां मानस्य पत्नीमग्निर्गर्भ इवा शये ॥

या । द्विऽपक्षा । चतु:ऽपक्षा । षट्ऽपक्षा । या । निऽमीयते । अष्टाऽपक्षाम् । दशऽपक्षाम् । शालाम् । मानस्य । पत्नीम् । अग्नि: । गर्भ:ऽइव । आ । शये ॥३.२१॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. (या द्विपक्षा) = जो शाला दो पक्षों-कक्षागृहोंवाली है, (चतुष्पक्षा) = चार कक्षागृहोंवाली है, (या) = जो (षट्पक्षा निमीयते) = छह कक्षागृहोंवाली मानपूर्वक बनाई गई है। जो शाला (अष्टापक्षाम्) = आठ कक्षागृहोंवाली है, (दशपक्षां शालाम्) = और जो दस पक्षोंवाली शाला है, जो शाला (मानस्य पत्नीम्) = मान का रक्षण करनेवाली है, अर्थात् बड़े माप से बनाई गई है, उसमें मैं इसप्रकार (आशये) = निवास करता हूँ (इव) = जैसेकि (अग्निः) = जाठराग्नि (गर्भे) = उदर में निवास करती है अथवा जैसे जाठराग्नि और गर्भस्थ बालक अपने-अपने स्थान में सुरक्षित रहते हैं।
Essence
परिवार के छोटे-बड़े होने के अनुसार शाला दो से दस कक्षागृहों तक बनाया जा सकता है। ये सब कक्षागृह बड़े माप से बने हों। इनमें हम अतिशयेन सुरक्षितरूप में निवास करें।
Subject
द्विपक्षा-दशपक्षा
Information
सुचना-पं0 जयदेवजी शर्मा के अनुसार 'अग्निगर्भइव' का अर्थ यह है कि जैसे 'गर्भः अग्निः' गर्भस्थ बालक मातृगर्भ में सुरक्षित रहता है।