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Atharvaveda - Mantra 20

Atharvaveda 9/3/20

10 Sukta
31 Mantra
9/3/20
Devata- शाला Rishi- भृग्वङ्गिराः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- शाला सूक्त
Mantra with Swara
कु॒लायेऽधि॑ कु॒लायं॒ कोशे॒ कोशः॒ समु॑ब्जितः। तत्र॒ मर्तो॒ वि जा॑यते॒ यस्मा॒द्विश्वं॑ प्र॒जाय॑ते ॥

कु॒लाये॑ । अधि॑ । कु॒लाय॑म् । कोशे॑ । कोश॑: । सम्ऽउ॑ब्जित: । तत्र॑ । मर्त॑: । वि । जा॒य॒ते॒ । यस्मा॑त् । विश्व॑म् । प्र॒ऽजाय॑ते ॥३.२०॥

Mantra without Swara
कुलायेऽधि कुलायं कोशे कोशः समुब्जितः। तत्र मर्तो वि जायते यस्माद्विश्वं प्रजायते ॥

कुलाये । अधि । कुलायम् । कोशे । कोश: । सम्ऽउब्जित: । तत्र । मर्त: । वि । जायते । यस्मात् । विश्वम् । प्रऽजायते ॥३.२०॥

Meaning
१. 'कुलम् अयते अत्र' इस व्युत्पत्ति से कुलाय शब्द 'एक परिवार के रहने के स्थान' का वाचक है। (कुलाये अधि) = एक कुलाय पर (कुलायम्) = कुलाय तथा (कोशे) = एक कोश पर (कोश:) = दूसरा कोश (समुजित:) = सम्यक् आवृत्त हुआ-हुआ है। एक बड़े परिवार में एक भाई नीचे के मकान में रहता है तो दूसरा ऊपर रह रहा है। २. (तत्र) = वहाँ (मर्त:) = मनुष्य (विजायते) = विशिष्टरूप से अपनी शक्तियों का प्रादुर्भाव करता है, (यस्मात् विश्वं प्रजायते) = जिससे कोई भी सन्तान असर्वाङ्ग [अ-विश्व, विकलांग] उत्पन्न नहीं होती-सब सन्तान सर्वाङ्ग ही होती हैं।
Essence
एक बड़े परिवार में एक भाई नीचे के गृह में रहता है तो दूसरा ऊपर के। सब मिलकर प्रेम से अपनी शक्तियों का विस्तार करते हैं, परिणामतः इनकी सब सन्ताने सर्वाङ्ग ही होती हैं।
Subject
विश्व प्रजनन

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