Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 11

Atharvaveda 9/3/11

10 Sukta
31 Mantra
9/3/11
Devata- शाला Rishi- भृग्वङ्गिराः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- शाला सूक्त
Mantra with Swara
यस्त्वा॑ शाले निमि॒माय॑ संज॒भार॒ वन॒स्पती॑न्। प्र॒जायै॑ चक्रे त्वा शाले परमे॒ष्ठी प्र॒जाप॑तिः ॥

य: । त्वा॒ । शा॒ले॒ । नि॒ऽमि॒माय॑ । स॒म्ऽज॒भार॑ । वन॒स्पती॑न् । प्र॒ऽजायै॑ । च॒क्रे॒ । त्वा॒ । शा॒ले॒ । प॒र॒मे॒ऽस्थी । प्र॒जाऽप॑ति: ॥३.११॥

Mantra without Swara
यस्त्वा शाले निमिमाय संजभार वनस्पतीन्। प्रजायै चक्रे त्वा शाले परमेष्ठी प्रजापतिः ॥

य: । त्वा । शाले । निऽमिमाय । सम्ऽजभार । वनस्पतीन् । प्रऽजायै । चक्रे । त्वा । शाले । परमेऽस्थी । प्रजाऽपति: ॥३.११॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. हे (शाले) = गृह ! (यः त्वा निमिमाय) = जो तुझे मानपूर्वक बनाता है और इस घर में (वनस्पतीन्) = वानस्पतिक पदार्थों का (संजभार) = संग्रह करता है,हे (शाले) = गृह | वह (त्वा) = तुझे (प्रजायै चक्रे) = उत्तम सन्तान के लिए बनाता है। जिस घर में मांस आदि पदार्थों का प्रवेश होता है, वह उत्तम सन्तानवाला नहीं बनता। २. उत्तम सन्तानों का निर्माता यह गृहपति (परमेष्ठी) = परम स्थान में स्थित होता है-मोक्ष को प्राप्त करता है और यहाँ (प्रजापति:) = प्रजाओं का रक्षक होता है|
Essence
घर को मानपूर्वक बनाना चाहिए। इसमें वानस्पतिक पदार्थों का ही संग्रह करना चाहिए. परिणामतः घर में सन्तान उत्तम होते हैं और यह गृहपति प्रजारक्षक होता हुआ मोक्ष प्राप्त करता है।
Subject
अमांस भोजन व उत्तम सन्तान-निर्माण