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Atharvaveda - Mantra 2

Atharvaveda 9/10/2

10 Sukta
28 Mantra
9/10/2
Devata- गौः, विराट्, अध्यात्मम् Rishi- ब्रह्मा Chhanda- भुरिक्त्रिष्टुप् Suktam- आत्मा सूक्त
Mantra with Swara
गा॑य॒त्रेण॒ प्रति॑ मिमीते अ॒र्कम॒र्केण॒ साम॒ त्रैष्टु॑भेन वा॒कम्। वा॒केन॑ वा॒कं द्वि॒पदा॒ चतु॑ष्पदा॒क्षरे॑ण मिमते स॒प्त वाणीः॑ ॥

गा॒य॒त्रेण॑ । प्रति॑ । मि॒मी॒ते॒ । अ॒र्कम् । अ॒र्केण॑ । साम॑ । त्रैस्तु॑भेन । वा॒कम् । वा॒केन॑ । वा॒कम् । द्वि॒ऽपदा॑ । चतु॑:ऽपदा । अ॒क्षरे॑ण । मि॒म॒ते॒ । स॒प्त । वाणी॑: ॥१५.२॥

Mantra without Swara
गायत्रेण प्रति मिमीते अर्कमर्केण साम त्रैष्टुभेन वाकम्। वाकेन वाकं द्विपदा चतुष्पदाक्षरेण मिमते सप्त वाणीः ॥

गायत्रेण । प्रति । मिमीते । अर्कम् । अर्केण । साम । त्रैस्तुभेन । वाकम् । वाकेन । वाकम् । द्विऽपदा । चतु:ऽपदा । अक्षरेण । मिमते । सप्त । वाणी: ॥१५.२॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. (गायत्रेण) = यज्ञ के द्वारा (अर्कम्) = उपासना को-पूजा को (प्रतिमिमीते) = सम्यक्तया सिद्ध करता है, अर्थात् प्रभु का वास्तविक उपासन यज्ञों के द्वारा ही निष्पत्र होता है (यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवाः') = देव यज्ञरूप विष्णु की यज्ञों के द्वारा ही उपासना करते हैं। (अर्केण) = इस अर्चना से ही (साम) = सच्ची शान्ति प्राप्त होती है। उपासना से ही त्रिविध तापों का निरोध होकर जीवन शान्त बनता है। (त्रैष्टुभेन वाकम्) = त्रिविध तापों के समाप्त होने पर ज्ञान [वेदवाणी] की प्रासि होती है। सब प्रकार से शान्त वातावरण में ही ज्ञान का विकास होता है। २. (वाकेन बाकम्) = अब एक ज्ञान से दूसरा ज्ञान (द्विपदा चतुष्पदा) = दिन दुगना और रात चौगुना [by leaps and bounds] बढ़ने लगता है, अर्थात् हम ज्ञान-प्राप्ति के मार्ग पर पूर्ण तीव्रता से बढ़ चलते हैं। प्रारम्भिक साधना ही समय की अपेक्षा करती है, फिर ज्ञान की वृद्धि होने लगती है और यह साधक अक्षरेण-अविनाशी, सर्वव्यापक प्रभु के द्वारा (सप्त वाणी: प्रति मिमते) = सप्त छन्दोमयी इस वेदवाणी को मापने लगते हैं। हृदयस्थ प्रभु ही इन्हें वेद का साक्षात्कार कराने लगते हैं।
Essence
हम यज्ञों के द्वारा प्रभु का उपासन करें। इस उपासन से हमारा जीवन दुःखत्रय निवृत्ति द्वारा शान्त बनेगा। शान्त जीवन में ज्ञानवृद्धि होगी और उत्तरोत्तर ज्ञान-वृद्धि होती हुई, हमें हृदयस्थ प्रभु से ज्ञान-सन्देश के सुनने के योग्य बनाएगी।
Subject
गायत्र-अर्क-साम [त्रैष्टुभ]-वाक्