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Atharvaveda - Mantra 1

Atharvaveda 8/6/1

10 Sukta
26 Mantra
8/6/1
Devata- मातृनामा अथवा मन्त्रोक्ताः Rishi- मातृनामा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- गर्भदोषनिवारण सूक्त
Mantra with Swara
यौ ते॑ मा॒तोन्म॒मार्ज॑ जा॒तायाः॑ पति॒वेद॑नौ। दु॒र्णामा॒ तत्र॒ मा गृ॑धद॒लिंश॑ उ॒त व॒त्सपः॑ ॥

यौ । ते॒ । मा॒ता । उ॒त्ऽम॒मार्ज॑ । जा॒ताया॑: । प॒ति॒ऽवेद॑नौ । दु॒:ऽनामा॑ । तत्र॑ । मा । गृ॒ध॒त् । अ॒लिंश॑: । उ॒त । व॒त्सऽप॑: ॥६.१॥

Mantra without Swara
यौ ते मातोन्ममार्ज जातायाः पतिवेदनौ। दुर्णामा तत्र मा गृधदलिंश उत वत्सपः ॥

यौ । ते । माता । उत्ऽममार्ज । जाताया: । पतिऽवेदनौ । दु:ऽनामा । तत्र । मा । गृधत् । अलिंश: । उत । वत्सऽप: ॥६.१॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. हे युवति ! (जातायाः ते) = [जनी प्रादुर्भावे] यौवन के ठीक रूप से प्रादुर्भाववाली तेरे लिए (पति-वेदनौ) = पति के रूप में प्राप्त होनेवाले (यौ) = जिनको माता-तेरी माता ने (उन्ममार्ज) = [ऊर्ध्वमुखं ममार्ज, पत्युः परिग्रहाय परिहतवती-सा०] स्पष्ट ही अस्वीकार कर दिया है। वे दोनों ही (तत्र मा गृधत्) = तुझ युवति के साथ विवाह के लिए आकांक्षा न करें। २. उनमें से एक तो (दुर्गामा) = कुष्ठ या अर्श [बवासीर] नामक पापरोगवाला है, (उत) = और दूसरा (अलिंश:) = [अलि श्यति-अल-शक्ति] शक्ति को क्षीण करनेवाला, (अतएव वत्सपः) [वत्सपिवः] = बच्चों को पी जानेवाला-शिशुनाशक है।
Essence
वर के वरण के समय यह ध्यान रखना चाहिए कि वह कुष्ठ व अर्श आदि पापरोगों से पीड़ित न हो तथा क्षीणशक्ति और शिशुनाशक न हो।
Subject
दुर्णामा तथा अलिंश