Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 20

Atharvaveda 8/3/20

10 Sukta
26 Mantra
8/3/20
Devata- अग्निः Rishi- चातनः Chhanda- त्रिष्टुप् Suktam- शत्रुनाशन सूक्त
Mantra with Swara
प॒श्चात्पु॒रस्ता॑दध॒रादु॒तोत्त॒रात्क॒विः काव्ये॑न॒ परि॑ पाह्यग्ने। सखा॒ सखा॑यम॒जरो॑ जरि॒म्णे अग्ने॒ मर्ताँ॒ अम॑र्त्य॒स्त्वं नः॑ ॥

प॒श्चात् । पु॒रस्ता॑त् । अ॒ध॒रात् । उ॒त । उ॒त्त॒रात् । क॒वि: । काव्ये॑न । परि॑ । पा॒हि॒ । अ॒ग्ने॒ । सखा॑ । सखा॑यम् । अ॒जर॑: । ज॒रि॒म्णे । अग्ने॑ । मर्ता॑न् । अम॑र्त्य: । त्वम् । न॒: ॥३.२०॥

Mantra without Swara
पश्चात्पुरस्तादधरादुतोत्तरात्कविः काव्येन परि पाह्यग्ने। सखा सखायमजरो जरिम्णे अग्ने मर्ताँ अमर्त्यस्त्वं नः ॥

पश्चात् । पुरस्तात् । अधरात् । उत । उत्तरात् । कवि: । काव्येन । परि । पाहि । अग्ने । सखा । सखायम् । अजर: । जरिम्णे । अग्ने । मर्तान् । अमर्त्य: । त्वम् । न: ॥३.२०॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. हे (राजन्) = ज्ञानदीप्त प्रभो! अथवा ब्रह्माण्ड को नियमित करनेवाले प्रभो! आप (कवि:) = क्रान्तदर्शी-तत्त्वज्ञानी हैं, आप (काव्येन) = इस वेदरूप अजरामर काव्य के द्वारा [पश्य देवस्य काव्यं न ममार न जीर्यति] (पश्चात् पुरस्तात्) = पीछे व आगे से-पश्चिम व पूर्व से (अधरात् उत उत्तरात्) = नीचे व ऊपर से-दक्षिण व उत्तर से हमें (परिपाहि) = रक्षित कीजिए। आपके इस काव्य की प्रेरणा के अनुसार चलते हुए हम सदा सुरक्षित जीवन बिता पाएँ। २. हे (अग्ने) = हमें आगे ले-चलनेवाले प्रभो! आप (सखा) = हमारे मित्र हो, (सखायम्) = मुझ सखा को आप [परिपाहि] रक्षित कीजिए। अजर:-कभी जीर्ण न होनेवाले आप हमें जरिम्णे-पूर्ण जरावस्थावाले जीवन को प्राप्त कराइए । त्वं अमर्त्यः आप अमर्त्य है, नः मन्-िहम मरणधर्मा अपने मित्रों को पूर्ण जीवनरूप अमरता प्राप्त करानेवाले हैं। आपके मित्र बनकर हम पूरे सौ वर्ष तक जीनेवाले बनें।
Essence
प्रभु हमें वेदरूपी काव्य के द्वारा पाप से बचाकर पूर्ण जीवन प्राप्त कराएँ।
Subject
रक्षण व पूर्ण जीवन