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Atharvaveda - Mantra 2

Atharvaveda 8/3/2

10 Sukta
26 Mantra
8/3/2
Devata- अग्निः Rishi- चातनः Chhanda- भुरिक्त्रिष्टुप् Suktam- शत्रुनाशन सूक्त
Mantra with Swara
अयो॑दंष्ट्रो अ॒र्चिषा॑ यातु॒धाना॒नुप॑ स्पृश जातवेदः॒ समि॑द्धः। आ जि॒ह्वया॒ मूर॑देवान्रभस्व क्र॒व्यादो॑ वृ॒ष्ट्वापि॑ धत्स्वा॒सन् ॥

अय॑:ऽदंष्ट्र: । अ॒र्चिषा॑ । या॒तु॒ऽधाना॑न् । उप॑ । स्पृ॒श॒ । जा॒त॒ऽवे॒द॒: । सम्ऽइ॑ध्द: । आ । जि॒ह्वया॑ । मूर॑ऽदेवान् । र॒भ॒स्व॒ । क्र॒व्य॒ऽअद॑: । वृ॒ष्ट्वा । अपि॑ । ध॒त्स्व॒ । आ॒सन् ॥३.२॥

Mantra without Swara
अयोदंष्ट्रो अर्चिषा यातुधानानुप स्पृश जातवेदः समिद्धः। आ जिह्वया मूरदेवान्रभस्व क्रव्यादो वृष्ट्वापि धत्स्वासन् ॥

अय:ऽदंष्ट्र: । अर्चिषा । यातुऽधानान् । उप । स्पृश । जातऽवेद: । सम्ऽइध्द: । आ । जिह्वया । मूरऽदेवान् । रभस्व । क्रव्यऽअद: । वृष्ट्वा । अपि । धत्स्व । आसन् ॥३.२॥

Meaning
१.हे (जातवेदः) = सर्वज्ञ प्रभो! (समिद्धः) = गतमन्त्र के अनुसार क्रतुओं द्वारा दीप्त हुए-हुए (अयोदंष्ट्र:) =  तीक्ष्ण दंष्ट्राओंवाले आप (अर्चिषा) = अपनी ज्ञानज्वाला से (यातुधानान्) = पीड़ा का आधान करनेवाली राक्षसी वृत्तियों को (उपस्पृशम्) = समीपता से स्पर्श करते हुए भस्म कर देते हैं। आपके द्वारा सब अशुभ वृत्तियों दूर की जाती हैं। २. आप (मूरदेवान्) = [दिव् व्यवहारे] मूढ़तापूर्ण व्यवहार करनेवालों को (जिह्वया) = [Flame] ज्ञानज्वाला के द्वारा (आरभस्व) = [to form] उत्तम जीवनवाला बनाइए। (क्रव्यादः) = मांसभक्षण करनेवालों को वृष्ट्वा [to bestow]-ज्ञान देकर (आसन् अपिधत्स्व) = अपने मुख में धारण कीजिए [आसन्-face]। इसे अपने सामने अपनी उपासना में संलग्न कीजिए।
Essence
प्रभु के अनुग्रह से ज्ञानज्वाला द्वारा हमारे अशुभ कर्म नष्ट हो जाएँ और उपासना के द्वारा हमारा जीवन पवित्र बन जाए।
Subject
ज्ञान+उपासना

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