Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 4

Atharvaveda 8/2/4

10 Sukta
28 Mantra
8/2/4
Devata- आयुः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- प्रस्तारपङ्क्तिः Suktam- दीर्घायु सूक्त
Mantra with Swara
प्रा॒णेन॑ त्वा द्वि॒पदां॒ चतु॑ष्पदाम॒ग्निमि॑व जा॒तम॒भि सं ध॑मामि। नम॑स्ते मृत्यो॒ चक्षु॑षे॒ नमः॑ प्रा॒णाय॑ तेऽकरम् ॥

प्रा॒णेन॑ । त्वा॒ । द्वि॒ऽपदा॑म् । चतु॑:ऽपदाम् । अ॒ग्निम्ऽइ॑व । जा॒तम् । अ॒भ‍ि । सम् । ध॒मा॒मि॒ । नम॑: । ते॒ । मृ॒त्यो॒ इति॑ । चक्षु॑षे । नम॑: । प्रा॒णाय॑ । ते॒ । अ॒क॒र॒म् ॥२.४॥

Mantra without Swara
प्राणेन त्वा द्विपदां चतुष्पदामग्निमिव जातमभि सं धमामि। नमस्ते मृत्यो चक्षुषे नमः प्राणाय तेऽकरम् ॥

प्राणेन । त्वा । द्विऽपदाम् । चतु:ऽपदाम् । अग्निम्ऽइव । जातम् । अभ‍ि । सम् । धमामि । नम: । ते । मृत्यो इति । चक्षुषे । नम: । प्राणाय । ते । अकरम् ॥२.४॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. प्रभु कहते हैं कि (इव) = जैसे [जातम्] (अग्निम्) = उत्पन्न अग्नि को फंक आदि द्वारा दोस करते हैं, उसी प्रकार (द्विपदाम्) = दोषाये व (चतुष्पदाम्) = चौपाये पशुओं में (जातम्) = उत्पन्न हुए हुए तुझे (प्राणेन अभिसंधमामि) = प्राणशक्ति द्वारा संधमात करता हूँ-दीस करता हूँ। २. जीव उत्तर देता हुआ कहता है कि हे (मृत्यो) = अन्ततः सबका प्राणान्त करनेवाले प्रभो! (ते चक्षुषे नमः) = आपसे दी गई इन चक्षु आदि इन्द्रियों के लिए हम आपको नमस्कार करते हैं। (ते प्राणाय नमः अकरम्) = आपसे दिये गये इन प्राणों के लिए हम आपको नमस्कार करते हैं। हमारा यह कर्तव्य हो जाता है कि आपसे दी गई इन चक्षु आदि इन्द्रियों को तथा आपसे दिये गये इन प्राणों को हम ठीक रक्खें-इनकी शक्ति में क्षीणता न आने दें।
Essence
प्रभु प्रत्येक प्राणी को प्राणों द्वारा दीप्स जीवनवाला बनाते हैं। हमारा मूल कर्त्तव्य यही है कि हम प्रभु-प्रदत्त इन्द्रियों व प्राणों को स्वस्थ रखें।
Subject
इन्द्रियों व प्राणों को दीस बनाना