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Atharvaveda - Mantra 24

Atharvaveda 8/2/24

10 Sukta
28 Mantra
8/2/24
Devata- आयुः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- दीर्घायु सूक्त
Mantra with Swara
सोरि॑ष्ट॒ न म॑रिष्यसि॒ न म॑रिष्यसि॒ मा बि॑भेः। न वै तत्र॑ म्रियन्ते॒ नो य॑न्ति अध॒मं तमः॑ ॥

स: । अ॒रि॒ष्ट॒ । न । म॒रि॒ष्य॒सि॒ । न । म॒रि॒ष्य॒सि॒ । मा । ब‍ि॒भे॒: । न । वै । तत्र॑ । म्रि॒य॒न्ते॒ । नो इति॑ । य॒न्ति॒ । अ॒ध॒मम् । तम॑: ॥२.२४॥

Mantra without Swara
सोरिष्ट न मरिष्यसि न मरिष्यसि मा बिभेः। न वै तत्र म्रियन्ते नो यन्ति अधमं तमः ॥

स: । अरिष्ट । न । मरिष्यसि । न । मरिष्यसि । मा । ब‍िभे: । न । वै । तत्र । म्रियन्ते । नो इति । यन्ति । अधमम् । तम: ॥२.२४॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. हे (अरिष्ट) = रोगादि से की जानेवाली हिंसा से रहित पुरुष ! (सः) = वह तू (न मरिष्यसि) = मृत्यु को प्राप्त नहीं होगा, (न मरिष्यसि) = निश्चय ही तु मरने नहीं लगा, इसलिए (मा बिभे:) = डर मत। २. (तत्र) = वहाँ जहाँ कि 'ब्रह्म' को परिधि [रक्षक] बनाया जाता है, (वै) = निश्चय से लोग (न म्रियन्ते) = असमय में मृत्यु का शिकार नहीं होते और (अधमं तमः) = मरणकालीन दु:सह मुर्छा को भी (नो यन्ति) = नहीं प्राप्त होते अथवा मृत्यु के बाद अन्धतमस् से आवृत असुर्य लोकों को प्राप्त नहीं होते।
Essence
हम रोगादि से हिंसित न होने पर असमय में मृत्यु का शिकार न होंगे। 'ब्रह्म' को अपनी परिधि बनाने पर न असमय में मरेंगे, न ही अन्धकारमय लोकों को प्राप्त होंगे।

 
Subject
न मृत्यु, न अधर्म तमः